हे कृष्ण ,
तुमने तो सर पर चढ़ती नदी का
सर छुआ था
तो वह आशीष ले
लोट गई थी
अपने पुरानी सतह पर।
हम चाहते हैं
तुम पुनःआओ
अपने पग सर पर रखो
पर छुओ मत,
हम अपना सर उठायेगें
और उठायेगें
पर गिरना नहीं चाहते
वापस
पुरानी सतह तक।
जन्माष्टमी की बधाइयाँ।
मुन्ना 8709404063
2/9/2018
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