Saturday, 3 March 2018

कह दे अपना ऐ इन्सां तू 5 √

कह  दे  अपना   ऐ   इंसां तू
चुप     रहना    बेमानी     है,
साये  के  पीछे    छुपना   तो
बेस्वाद  हुआ  सा   पानी  है।

कहां  बखत  फूलों   का  था
कांटों   से    भिड़   जाते  थे,
अब  तो  ओस  की  बूंदें  भी
बीती     हुई     कहानी    है।

हर  नाव  के  पीछे  लगी  हो
जैसे    मौज     सयानी   सी,
आहट     मेरी    मंजिल  की
जमाने    सी     पुरानी    है।

चाहा     न      मैने     इतना
कभी   किसी   अंजाने   को,
रेत   पे   चल   धीमा    होना
नहीं  लगी  मुझे  नादानी  है।

बिन  लगे  मुलम्मे  शीशे  पर
क्या कभी कोई अक्स आया,
रात  अंधेरी   मे  ही  दिखती
जुगनू  की  खुली  जवानी है।

मुन्ना 8709404063