Wednesday, 5 September 2018

चट्टानों के साये में 200√


चट्टानों के साये में बस  जिंदगी  खुशहाल है,
परिंदे के फुनगी बता  बारिश में क्या हाल है।

शैताँ  के आशियाने में  मरघट  इन्साँ  का है,
कंकाल नाच-नाच कर  दे रहा फिर  ताल हैं।

सितारे बुलाने को हमने दीये जला लिए यहाँ,
बिछा जमीं पर दिख रहा अजीब सा जाल है।

बिजली गिरने की  खबर  हवा ले चली आई,
डोल रहा  हर  जर्रा  आदमी  हुआ मताल है।

चढ़ी  परतें  रुतों का  जाने कितनी  मुझ पर,
न  हो सकी आजतक  खुद  की  पड़ताल है।

सुबह की खुमारी खुशबू उतरी है हसीना सी,
अभी-अभी  नदियों  का  पानी हुआ  लाल है।

मुन्ना  8709404063
6/9/2018

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