Monday, 13 August 2018

मैं चिराग हूँ जलूगाँ 182√ः

मैं  चिराग  हूँ  जलूगाँ   सूरज  के  रूबरू,
चाँदनी  में पली शबनम  की जान नहीं हूँ।

ऐ  गुलाब  तू  बजा  रहा  इश्क का  डंका,
मैं  जमीं  का जर्रा  कोई  पहचान नहीं हूँ।

बसर की मैंने जिन्दगी अपनी ही शर्तों पर,
जलते  दीये  की  लौ  का  ईमान  नहीं  हूँ।

मैं  खुशी का टुकड़ा  बस देता थोड़ा सुकूँ,
मौशिकी के लहरों  का कोई  तान नहीं हूँ।

इश्क   मेरी  जान  है   इश्क  ही  जुस्तजु,
बादलों  का  कैदी   हूँ  परेशान   नहीं  हूँ।

पत्थर  मिहनतों  का  मैं ढोता  रहा  सदा,
मजदूर  पसीने  का  हूँ  सुल्तान  नहीं  हूँ।

मुन्ना  8709404063
14/8/2018

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